चीन के लिए इस बार सर्दी बड़ी आफत बन सकती है, यहां कोरोना का खतरा एक बार फिर बढ़ने लगा है. अक्टूबर माह में 24 मौतों का मामला सामना आने के बाद विशेषज्ञों ने इस बावत चेतावनी भी जारी की है. सरकारी ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक चीन के श्वसन रोग विशेषज्ञों ने सर्दी के मौसम में कोविड-19 संक्रमण बढ़ने का अंदेशा जताया है. चिकित्सकों ने यह भी सलाह दी है कि बुजुर्गों और कमजोर आबादी जल्द से जल्द कोविड टीकाकरण करा ले. इस चेतावनी के बाद एक बार फिर ये अंदेशा जताया जाने लगा है कि क्या कोरोना एक बार फिर वापस लौट रहा है?

कोरोना का पहला केस चीन के वुहान शहर में मिला था. इसके बाद से वायरस ने दुनिया भर में अपना आतंक मचाया था, करोड़ों लोग इससे संक्रमित हुए थे और लाखों लोगों ने अपनी जान गंवाई थी. अब एक बार फिर वायरस बड़ा खतरा बन सकता है, चीन में पिछले माह कोरोना से हुई 24 मौतों के आंकड़े इस बड़े खतरे का संकेत दे रहे हैं. माना जा रहा है कि यदि चीन में हालात फिर बेकाबू हुए तो वायरस का नया वैरिएंट फिर से हमला कर सकता है.

अक्टूबर में हुईं 24 मौतें

चीन में पिछले माह कोरोना के केसों में अच्छी खासी बढ़ोतरी देखी गई थी. चीनी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र की मानें तो अक्टूबर में कोरोना के तकरीबन 209 गंभीर मामले सामने आए थे, इनमें से 24 की मौत हो गई थी. चीन सरकार के मुताबिक इन सभी मौतों का कारण कोरोना का XBB वैरिएंट था. कोरोना का यह स्ट्रेन विशेष तौर पर सर्दी के मौसम में ही एक्टिव होता है. जो संक्रमण के मामलों में बड़ी तेजी का कारण बन सकता है.

चीन में क्यों बढ़ रहा संक्रमण

चीन के वुहान शहर में कोरोना का पहला केस मिला था, धीरे-धीरे ये महामारी में बदल गया, जब कोरोना के केस ज्यादा बढ़े तो चीन ने जीरो कोविड रणनीति का पालन किया था. इस रणनीति के तहत चीन को सफलता मिली थीं, लेकिन दिसंबर 2022 के बाद से चीन ने इस नीति को छोड़ दिया. इसके बाद चीन ने इस नीति को छोड़ दिया, इससे कोरोना का स्तर पीक पर पहुंच गया. विशेषज्ञों के मुताबिक जीरो कोविड पॉलिसी की वजह से चीन की ज्यादातर आबादी कोरोना से संक्रमित ही नहीं हुई थी. इस वजह से उनमें प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं हो पाई थी. इसके अलावा चीन में जो वैक्सीन विकसित हुई वह भी बहुत प्रभावी नहीं मानी गई.

टीके का कम प्रभाव

चीन में कोरोना के प्रभाव से बचने के लिए बना गए टीकों का कम प्रभावी होना भी इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है, दरअसल में चीन में सिनोवैक और सिनोफार्मा दो टीके बनाए गए थे, चीन की ओर से जो आंकड़े जारी किए गए उनमें भी इनके बूस्टर डोज की संख्या साफ नहीं की गई. इसीलिए समय के साथ-साथ टीके कम प्रभावी होते जा रहे हैं. माना जा रहा है कि इसी वजह से अक्टूबर माह में कोरोना और उससे होने वाली मौतों के मामलों में तेजी आई थी. सर्दी के मौसम में इसमें और बढ़ोतरी हो सकती है.